बहादुरपुर सीएचसी बना मनमानी का अड्डा: डेंटल कक्ष में लटका ताला, इलाज के लिए भटक रहे दूर-दराज से आए मरीज।
क्या लापरवाह डेंटल डॉक्टर और डेंटल हाईजिनिस्ट के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह फाइलों को दबाकर मामले को 'लेन-देन' से रफा-दफा कर दिया जाएगा?
अजीत मिश्रा (खोजी)
स्वास्थ्य विभाग की खुली पोल: बहादुरपुर सीएचसी में ताले के पीछे छिपी है सीएमओ की मेहरबानी!
- ड्यूटी से नदारद डेंटल डॉक्टर और हाईजिनिस्ट: हरीश गुप्ता से भी दो कदम आगे निकले डेंटल डॉक्टर, शासन के आदेशों की उड़ रही धज्जियां।
- सीएमओ डॉ. राजीव निगम और अधिकारियों पर उठे सवाल: कथित मिलीभगत और ‘लेन-देन’ के खेल से रफा-दफा हो रहे हैं भ्रष्टाचार के मामले।
- ग्रामीणों में आक्रोश: स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से जांच की मांग, चेताया—सुधार नहीं हुआ तो होगा बड़ा आंदोलन।
बहादुरपुर (बस्ती) — एक तरफ सरकार ग्रामीण अंचल के लोगों को घर-द्वार पर बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं दूसरी ओर बस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) बहादुरपुर में जिम्मेदारों की लापरवाही इन दावों की धज्जियां उड़ा रही है। आलम यह है कि अस्पताल के डेंटल कक्ष में मरीजों के इलाज की बजाय हमेशा ताला लटका रहता है, और दांत के दर्द से कराहते मरीज रोज अस्पताल के चक्कर काटने को मजबूर हैं।

🔒 गायब डॉक्टर और हाईजिनिस्ट, ठप्प पड़ी डेंटल सेवाएं
सीएचसी बहादुरपुर में तैनात डेंटल डॉक्टर और डेंटल हाईजिनिस्ट हरीश गुप्ता अपनी ड्यूटी से गायब रहने में मानो रिकॉर्ड बना रहे हैं। हैरत की बात यह है कि अब तो डेंटल डॉक्टर भी अपने सहकर्मी हाईजिनिस्ट से एक कदम आगे निकलकर ड्यूटी से नदारद रहने लगे हैं।
दूर-दराज के ग्रामीण इलाकों से दांत का इलाज कराने आने वाले मरीजों को जब अस्पताल के कमरे पर ताला लटका मिलता है, तो उनकी पीड़ा और बढ़ जाती है। समय पर उपचार न मिलने के कारण मरीजों को न केवल आर्थिक क्षति उठानी पड़ रही है, बल्कि मानसिक प्रताड़ना का भी सामना करना पड़ रहा है।
💰 सीएमओ कार्यालय की मिलीभगत और ‘लेन-देन’ का खेल!
इस पूरे खेल के पीछे स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों की सुस्त कार्यशैली और कथित संलिप्तता साफ तौर पर उजागर हो रही है:
- पुरानी शिकायतों पर पर्दा: पूर्व में भी डेंटल हाईजिनिस्ट हरीश गुप्ता के लगातार ड्यूटी से गायब रहने का मामला प्रमुखता से उठाया गया था, लेकिन कार्रवाई के नाम पर इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
- भ्रष्टाचार के तार: चर्चा है कि सीएमओ कार्यालय में बैठे बाबू अभिषेक पाल, डिप्टी सीएमओ डॉ. ए.के. चौधरी और सीएमओ डॉ. राजीव निगम की कथित मिलीभगत और ‘लेन-देन’ के चलते इन लापरवाह कर्मियों पर आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है।
- संरक्षण का नतीजा: विभाग के इन शीर्ष अधिकारियों की मेहरबानी का ही नतीजा है कि डेंटल स्टाफ केौसले बुलंद हैं और वे शासन के दिशा-निर्देशों को ठेंगा दिखाते हुए अस्पताल सेदार नदारद रहते हैं।
❓ जनता का सवाल: कब होगी कार्रवाई या मामला फिर होगा रफा-दफा?
स्थानीय ग्रामीणों और मरीजों ने स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों से इस गंभीर मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। जनता का सीधा सवाल यह है कि:
क्या लापरवाह डेंटल डॉक्टर और डेंटल हाईजिनिस्ट के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई होगी, या फिर हर बार की तरह फाइलों को दबाकर मामले को ‘लेन-देन’ से रफा-दफा कर दिया जाएगा?
यदि जल्द ही सीएचसी बहादुरपुर की डेंटल सेवाओं को नियमित और सुचारु रूप से संचालित नहीं किया गया, तो ग्रामीण सड़कों पर उतरकर आंदोलन करने को बाध्य होंगे।















